Workers Salary Hike: दिवाली से पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिकों को एक बड़ा तोहफा दिया है। राज्य सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी का ऐलान किया है, जिससे प्रदेश के लाखों श्रमिकों की आय में सीधा इजाफा होगा। नई मजदूरी दरें 1 अक्टूबर 2025 से लागू होकर 31 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेंगी। यह फैसला बढ़ती महंगाई को देखते हुए लिया गया है ताकि हर श्रमिक को उसके काम के अनुसार उचित भुगतान मिल सके।
मजदूरी में बढ़ोतरी का कारण
श्रम विभाग के अनुसार, मजदूरी बढ़ाने का आधार महंगाई सूचकांक (Consumer Price Index) रहा है। साल 2012 में यह सूचकांक 216 अंक था जो अब बढ़कर 414 अंक हो गया है। इसी के अनुरूप मजदूरी में बदलाव किया गया है।
नई दरों के अनुसार:
- अकुशल श्रमिकों की मासिक मजदूरी अब ₹5750 से बढ़कर ₹11021 हो गई है।
- अर्धकुशल श्रमिकों को ₹12123 प्रति माह मिलेंगे।
- कुशल श्रमिकों की मजदूरी ₹13580 प्रति माह तय की गई है।
इस बढ़ोतरी से श्रमिकों को रोजाना करीब ₹90 से ₹110 अधिक मिलेगा, जिससे उनकी आमदनी में स्पष्ट सुधार होगा।
ईंट भट्ठा श्रमिकों के लिए नई दरें
सरकार ने ईंट भट्ठे पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए भी नई मजदूरी तय की है:
- पथेरा श्रमिकों को अब ₹700 प्रति हजार ईंट दिए जाएंगे।
- भराई करने वाले श्रमिकों को ₹211 प्रति हजार ईंट (500 मीटर तक दूरी पर) और ₹253 प्रति हजार ईंट (500 मीटर से अधिक दूरी पर) मिलेंगे।
साथ ही, यह स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई ठेकेदार या मालिक इन दरों से कम भुगतान करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
श्रमिकों के अधिकार और विभाग की सख्ती
उप श्रम आयुक्त दीप्तिमान भट्ट ने साफ कहा है कि कोई भी मालिक या ठेकेदार तय की गई मजदूरी से कम भुगतान नहीं कर सकता। ऐसा करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी अपील की कि हर श्रमिक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहे और किसी भी प्रकार का शोषण होने पर तुरंत श्रम विभाग से संपर्क करे।
श्रमिकों की खुशी और उम्मीदें
सरकार के इस फैसले से प्रदेश के हजारों श्रमिकों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है। बढ़ी हुई मजदूरी से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि परिवार का जीवन स्तर भी बेहतर होगा। कई श्रमिक संगठनों ने इस निर्णय को सरकार का श्रमिक हित में ऐतिहासिक कदम बताया है।
निष्कर्ष:
न्यूनतम मजदूरी में यह बढ़ोतरी न केवल श्रमिकों के जीवन में खुशहाली लाएगी, बल्कि यह संदेश भी देगी कि सरकार श्रमिक वर्ग के हितों के प्रति संवेदनशील है। इस फैसले से राज्य में रोजगार की गुणवत्ता और श्रमिकों का भरोसा दोनों बढ़ेंगे।
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