सभी शिक्षकों पर अनिवार्य होगा TET? सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई से बढ़ी उम्मीदें TET Latest Update 2025

TET Latest Update 2025: शिक्षा की गुणवत्ता और समानता से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाज़े पर है। देशभर में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को सभी स्कूलों में अनिवार्य करने की मांग पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। अब तक यह परीक्षा केवल सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए अनिवार्य थी, लेकिन याचिका में निजी और अल्पसंख्यक संस्थानों को भी इसके दायरे में लाने की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट में आज होगी महत्वपूर्ण सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ — न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ए. जी. मसीह — आज इस याचिका पर सुनवाई करेंगी। याचिका में कहा गया है कि जब सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य है, तो बाकी संस्थानों को इससे बाहर रखना असमानता पैदा करता है। अदालत के इस फैसले से यह तय होगा कि क्या देशभर में हर शिक्षक को बच्चों को पढ़ाने के लिए TET परीक्षा पास करनी होगी या नहीं।

शिक्षा की गुणवत्ता और समानता पर बड़ा सवाल

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र नितिन उपाध्याय द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया है कि शिक्षा का अधिकार हर बच्चे का मूल अधिकार है। इसलिए चाहे बच्चा सरकारी स्कूल में पढ़े या निजी या अल्पसंख्यक स्कूल में, उसे समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि कुछ स्कूलों को टीईटी से छूट देना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21ए (शिक्षा का अधिकार) के खिलाफ है।

याचिका में कानून की धाराओं पर भी सवाल

याचिका में शिक्षा का अधिकार कानून (RTE Act, 2009) की धारा 1(4) और 1(5) को चुनौती दी गई है। इन धाराओं के कारण कुछ निजी और अल्पसंख्यक स्कूलों को टीईटी परीक्षा से छूट मिलती है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह छूट शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करती है और समान अवसर के सिद्धांत के विपरीत है।

अनुच्छेद 30 की व्याख्या पर निर्भर करेगा बड़ा फैसला

अल्पसंख्यक संस्थानों को अपने स्कूल चलाने का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 30 में दिया गया है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अब यह सवाल है कि क्या यह अधिकार शिक्षा की गुणवत्ता से ऊपर हो सकता है। अदालत को यह तय करना होगा कि क्या अनुच्छेद 30 के अंतर्गत छूट देने से बच्चों के शिक्षा के अधिकार पर असर पड़ता है या नहीं।

आने वाले समय में तय होगा शिक्षकों का भविष्य

अगर सुप्रीम कोर्ट सभी शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्य कर देता है, तो देशभर में लाखों शिक्षकों को यह परीक्षा देनी होगी। यह फैसला न केवल शिक्षकों के लिए बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। वहीं अगर अल्पसंख्यक संस्थानों को छूट बरकरार रखी जाती है, तो शिक्षा में दोहरे मानक की बहस और तेज हो सकती है।

निष्कर्ष:

यह मामला केवल परीक्षा का नहीं, बल्कि भारत में शिक्षा की समानता और गुणवत्ता के भविष्य का है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाले समय में यह तय करेगा कि क्या हर शिक्षक को एक ही मानक पर परखा जाएगा या नहीं। सभी की निगाहें अब देश की सर्वोच्च अदालत पर टिकी हैं।

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