बीएड (B.Ed) और डीएलएड (D.El.Ed) अभ्यर्थियों से जुड़ी लंबी बहस और कानूनी जद्दोजहद के बाद आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर बड़ा फैसला सुनाया है। अब बीएड धारक तभी प्राथमिक शिक्षक बनने के पात्र माने जाएंगे, जब वे एनआईओएस (NIOS) द्वारा आयोजित ब्रिज कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा करेंगे। इस फैसले ने उन शिक्षकों के लिए स्पष्ट दिशा तय कर दी है, जो लंबे समय से अपनी पात्रता को लेकर असमंजस में थे।
सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त अवसर की मांग ठुकराई
सुप्रीम कोर्ट में प्रयागराज के कुछ शिक्षकों ने यह याचिका दायर की थी कि उन्हें ब्रिज कोर्स पूरा करने के लिए एक और अवसर दिया जाए। लेकिन 8 अक्टूबर को हुई सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने इस याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि जो शिक्षक निर्धारित अवधि में ब्रिज कोर्स पूरा नहीं करेंगे, उनकी नियुक्ति स्वतः अमान्य हो जाएगी। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि नियम सबके लिए समान हैं और किसी को विशेष राहत नहीं दी जा सकती।
ब्रिज कोर्स की प्रक्रिया और समयसीमा तय
राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) को इस ब्रिज कोर्स के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। आवेदन प्रक्रिया 1 नवंबर से 15 नवंबर तक ऑनलाइन चलेगी, जबकि प्रशिक्षण कार्यक्रम 1 दिसंबर से शुरू होकर 30 मई तक चलेगा। पूरा कोर्स ऑनलाइन माध्यम से कराया जाएगा, जिससे देश के किसी भी हिस्से में मौजूद शिक्षक आसानी से इसमें भाग ले सकेंगे। एनसीटीई (NCTE) ने इस कार्यक्रम को 2 जुलाई 2025 को मंजूरी दी थी।
बीएड धारकों के लिए समानता का रास्ता खुला
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब बीएड धारकों के लिए प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में नई राह खुल गई है। पहले केवल डीएलएड (D.El.Ed) या बीटीसी (BTC) अभ्यर्थियों को ही प्राथमिक शिक्षक बनने का अधिकार था, लेकिन अब ब्रिज कोर्स पूरा करने के बाद बीएड शिक्षक भी उनके बराबर माने जाएंगे। यह कोर्स (PDPET) शिक्षकों को बाल मनोविज्ञान, मूल्य शिक्षा, शिक्षण तकनीक और मूल्यांकन की आधुनिक पद्धतियों की गहन जानकारी देगा।
क्यों जरूरी है यह बदलाव
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, प्राथमिक स्तर की शिक्षा बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास की नींव होती है। इसलिए शिक्षकों को इस स्तर पर पढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट और एनसीटीई ने ब्रिज कोर्स को अनिवार्य किया है ताकि बीएड शिक्षक प्राथमिक शिक्षा के अनुरूप प्रशिक्षण लेकर बच्चों को बेहतर तरीके से शिक्षित कर सकें।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय देशभर के बीएड अभ्यर्थियों के लिए स्पष्ट दिशा लेकर आया है। अब उन्हें प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण लेना ही होगा। यह कदम न केवल शिक्षा प्रणाली में समानता लाएगा, बल्कि शिक्षण की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाएगा। जो शिक्षक समय पर ब्रिज कोर्स पूरा करेंगे, वे भविष्य में सरकारी और निजी दोनों प्रकार के प्राथमिक विद्यालयों में अवसर प्राप्त कर सकेंगे।