सरकार का बड़ा फैसला: लाखों कर्मचारियों को दिवाली से पहले मिला तोहफा, डीए में 3% की बढ़ोतरी हुई DA Hike Latest News

DA Hike Latest News: दिवाली से पहले झारखंड सरकार ने लाखों कर्मचारियों और पेंशनधारकों को एक बड़ा तोहफा दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कैबिनेट ने 7वें वेतन आयोग के अंतर्गत आने वाले सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। इस फैसले से राज्य के लगभग तीन लाख कर्मचारी और पेंशनर लाभान्वित होंगे। नई दरें 1 जुलाई 2025 से प्रभावी होंगी, और सरकार जुलाई से सितंबर तक का एरियर भी प्रदान करेगी।

कैबिनेट बैठक में लिया गया अहम निर्णय

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में कुल 24 प्रस्तावों पर मुहर लगी, जिनमें कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी सबसे प्रमुख रही। बैठक में निर्णय लिया गया कि बढ़ा हुआ डीए अक्टूबर माह की सैलरी में शामिल कर नवंबर में कर्मचारियों और पेंशनर्स के खातों में भेजा जाएगा। यह कदम न केवल कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा बल्कि राज्य सरकार के प्रति उनका भरोसा भी बढ़ाएगा।

पिछली बढ़ोतरी का संदर्भ

यह दूसरी बार है जब झारखंड सरकार ने 2025 में कर्मचारियों के डीए में वृद्धि की है। मई 2025 में भी राज्य सरकार ने डीए को 53% से बढ़ाकर 55% किया था। उस समय यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2025 से लागू की गई थी। मई में की गई घोषणा से 5वें और 6वें वेतन आयोग के तहत आने वाले कर्मचारियों को भी लाभ मिला था। अब 7वें वेतन आयोग के कर्मियों के लिए यह नई बढ़ोतरी एक और राहत लेकर आई है।

केंद्र सरकार और अन्य राज्यों की राह पर झारखंड

केंद्र सरकार ने पहले ही अपने कर्मचारियों का डीए 55% से बढ़ाकर 58% कर दिया था। इसके बाद राजस्थान, बिहार, गुजरात, त्रिपुरा, ओडिशा और अरुणाचल प्रदेश जैसे कई राज्यों ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाया। अब झारखंड भी उसी श्रेणी में शामिल हो गया है, जिसने अपने कर्मियों को राहत दी है। यह कदम इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकारें केंद्र की नीतियों के अनुरूप अपने कर्मचारियों को समान लाभ देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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आर्थिक प्रभाव और कर्मचारियों की प्रतिक्रिया

डीए बढ़ोतरी का सीधा असर राज्य के बजट पर पड़ेगा, लेकिन यह कर्मचारियों की आय में महत्वपूर्ण वृद्धि भी लाएगा। 3% की वृद्धि भले ही आंकड़ों में छोटी लगे, लेकिन यह लाखों परिवारों के लिए राहत की सांस लेकर आई है। सरकारी कर्मचारियों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे सरकार के प्रति कर्मचारियों की निष्ठा और मेहनत की सराहना के रूप में देखा जा रहा है।

राज्य के कई जिलों से मिली प्रतिक्रियाओं में कर्मचारियों ने कहा है कि लगातार बढ़ती महंगाई के दौर में यह बढ़ोतरी उनके घरेलू बजट को संतुलित करने में मदद करेगी। पेंशनर्स ने भी सरकार का आभार जताया है, क्योंकि इससे उनकी जीवनयापन की लागत में कुछ राहत मिलेगी।

बढ़ोतरी का वित्तीय पक्ष

राज्य सरकार के लिए यह बढ़ोतरी एक अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी लेकर आती है। अनुमान है कि इस 3% डीए वृद्धि से राज्य पर सालाना करोड़ों रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा। इसके बावजूद सरकार ने यह फैसला कर्मचारियों की भलाई के लिए किया है। वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार, सरकार ने पहले से ही इस बढ़ोतरी को अपने बजट प्रावधान में शामिल किया था ताकि किसी अन्य योजना पर इसका असर न पड़े।

डीए क्या है और यह क्यों जरूरी है?

महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) वह राशि होती है जो कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई की भरपाई के लिए दी जाती है। इसे मूल वेतन का एक प्रतिशत माना जाता है और हर छह महीने में इसे संशोधित किया जाता है। डीए में वृद्धि का उद्देश्य कर्मचारियों को उनके वास्तविक क्रय शक्ति में कमी से बचाना होता है। बढ़ती महंगाई के साथ जीवनयापन की लागत बढ़ती है, इसलिए सरकारें नियमित रूप से डीए संशोधन करती हैं।

भविष्य की संभावनाएँ

झारखंड सरकार के इस कदम के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि अन्य राज्य भी अपने कर्मचारियों के डीए में बढ़ोतरी कर सकते हैं। यदि महंगाई दर आने वाले महीनों में बढ़ती है, तो अगले वित्तीय वर्ष में एक और संशोधन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, केंद्र सरकार भी अगली समीक्षा के दौरान डीए को फिर से समायोजित कर सकती है।

कर्मचारियों के लिए इसका व्यावहारिक महत्व

डीए बढ़ने से कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी में वृद्धि होगी। इससे न केवल उनका खर्च संतुलित रहेगा, बल्कि बचत और निवेश के अवसर भी बढ़ेंगे। साथ ही, यह निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को ऊंचा करेगा और कार्यक्षमता में सुधार लाएगा। पेंशनर्स के लिए भी यह राहत की खबर है क्योंकि उनके मासिक पेंशन में भी समान अनुपात में बढ़ोतरी होगी।

सरकार की छवि पर असर

यह निर्णय सरकार की जन-हितैषी छवि को और मजबूत करता है। आगामी त्योहारी सीजन में इस फैसले से कर्मचारियों में सरकार के प्रति सकारात्मक भावना बनेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कदमों से न केवल आर्थिक संतुलन कायम रहता है बल्कि प्रशासनिक तंत्र में भरोसा भी बढ़ता है।

निष्कर्ष

झारखंड सरकार का यह फैसला राज्य के कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए एक बड़ा राहत भरा कदम है। बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबाव के बीच यह बढ़ोतरी उन्हें कुछ हद तक वित्तीय स्थिरता प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कैबिनेट ने इस निर्णय से यह संदेश दिया है कि सरकार अपने कर्मचारियों की भलाई के लिए संवेदनशील और सक्रिय है। आने वाले समय में यदि राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहती है, तो ऐसे और भी सकारात्मक फैसलों की उम्मीद की जा सकती है।

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