8th Pay Commission Breaking: सैलरी फॉर्मूले में बड़ा बदलाव, अब सिर्फ 50% डीए जोड़ा जाएगा बेसिक में

8th Pay Commission Breaking: सरकारी कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जनवरी 2026 से इसे लागू किए जाने की उम्मीद है, लेकिन इस बार सैलरी कैलकुलेशन में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार महंगाई भत्ते (DA) को पूरी तरह बेसिक पे में जोड़ने की जगह केवल 50% तक ही मर्ज करने पर विचार कर रही है। यह फैसला कर्मचारियों की सैलरी संरचना और भविष्य की बढ़ोतरी दोनों को प्रभावित कर सकता है।

क्यों नहीं जोड़ा जाएगा पूरा डीए

अब तक माना जा रहा था कि 2026 तक डीए की दर लगभग 61% तक पहुंच जाएगी, लेकिन सूत्रों के मुताबिक सरकार वित्तीय बोझ को कम करने के लिए पूरा डीए नहीं बल्कि केवल 50% तक ही बेसिक में शामिल करने का प्लान बना रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब डीए बेसिक में जुड़ता है, तो उसके साथ अन्य भत्ते जैसे HRA, TA आदि भी बढ़ जाते हैं। इससे केंद्र सरकार के बजट पर भारी दबाव पड़ सकता है।

कर्मचारियों की उम्मीदें और हकीकत

कर्मचारियों की यह उम्मीद थी कि जनवरी 2026 तक पूरा 61% डीए उनकी बेसिक सैलरी में मर्ज होगा, जिससे वेतन में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। लेकिन अगर सरकार केवल 50% डीए ही जोड़ती है, तो सैलरी की बढ़त उम्मीद से कम रह जाएगी। इसका सीधा असर फिटमेंट फैक्टर और ग्रॉस पे पर भी पड़ेगा, जिससे शुरुआती महीनों में कम लाभ दिख सकता है।

सैलरी पर वास्तविक असर

उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 50,000 रुपये है, तो 61% डीए मर्ज होने पर नई बेसिक लगभग 80,500 रुपये होती। लेकिन 50% मर्ज होने की स्थिति में यह केवल 75,000 रुपये तक पहुंचेगी। यानी सीधा 5,500 रुपये का अंतर। भविष्य में फिटमेंट फैक्टर लगने के बाद यह अंतर और ज्यादा बढ़ सकता है।

डीए का नया बेस ईयर और गणना

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार 8वें वेतन आयोग के साथ डीए का नया बेस ईयर भी लागू कर सकती है। फिलहाल इसका आधार वर्ष 2016=100 है, जिसे बदलकर 2026=100 किया जा सकता है। इससे डीए की गणना फिर से शून्य से शुरू होगी। इस कदम के जरिए सरकार यह तर्क दे सकती है कि पुराना 61% डीए मर्ज करना जरूरी नहीं है क्योंकि नई प्रणाली में पूरी गणना रीसेट हो जाएगी।

सरकार की रणनीति

सरकार का उद्देश्य कर्मचारियों को उचित वेतन वृद्धि देना है, लेकिन साथ ही राजकोषीय संतुलन बनाए रखना भी चुनौती है। ऐसा माना जा रहा है कि 1 जनवरी 2026 से पहले तक जमा डीए में से केवल 50% हिस्सा बेसिक में जोड़ा जाएगा और फिर डीए को शून्य से शुरू किया जाएगा। इससे कर्मचारियों को नई बेसिक पर डीए बढ़ने का फायदा मिलेगा, वहीं सरकार का वित्तीय भार भी नियंत्रित रहेगा।

निष्कर्ष

8वें वेतन आयोग को लेकर अभी कई बातें स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन संकेत साफ हैं कि सरकार “संतुलन नीति” अपनाने के मूड में है। कर्मचारियों को थोड़ा संयम रखना चाहिए क्योंकि डीए मर्ज का अंतिम फैसला अभी बाकी है। हालांकि, लंबे समय में नई बेसिक पर डीए बढ़ने से उन्हें लाभ ही मिलेगा। आने वाले महीनों में इस पर अंतिम फैसला सरकार द्वारा घोषित किया जा सकता है।

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