Outsourcing Employees News: उत्तर प्रदेश के लाखों आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लंबे समय से वेतन वृद्धि और सुरक्षा की मांग कर रहे इन कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। अब सरकार “आउटसोर्स सेवा निगम” का गठन करने जा रही है, जिसके लागू होने के बाद कर्मचारियों की सैलरी दोगुनी तक बढ़ जाएगी और कई नई सुविधाएं भी मिलने लगेंगी।
आउटसोर्स सेवा निगम से खत्म होगा ठेकेदारों का दखल
अब तक आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती निजी ठेकेदारों या एजेंसियों के माध्यम से की जाती थी। इससे कर्मचारियों को न तो समय पर वेतन मिलता था और न ही स्थिर नौकरी की गारंटी। लेकिन नए निगम के गठन के बाद सभी कर्मचारी सीधे सरकारी निगम के अधीन होंगे। इसका मतलब यह है कि ठेकेदार बदलने पर नौकरी जाने या नई शर्तें लागू होने जैसी समस्याओं का अंत हो जाएगा। इससे कर्मचारियों को न केवल स्थिरता मिलेगी बल्कि कार्य वातावरण भी बेहतर होगा।
निगम पंजीकरण की प्रक्रिया तेज़ी से पूरी हो रही
राज्य सरकार ने इस निगम के गठन की प्रक्रिया को शीर्ष प्राथमिकता दी है। मुख्य सचिव ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि निगम का पंजीकरण जल्द से जल्द पूरा किया जाए। तैयार किए जा रहे ड्राफ्ट के अनुसार, कर्मचारियों को हर महीने की 5 तारीख तक वेतन उनके बैंक खाते में भेजा जाएगा। इसके अलावा, उन्हें चिकित्सा अवकाश, आकस्मिक अवकाश और दुर्घटना बीमा जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी। महिला कर्मचारियों के लिए प्रसूति अवकाश और अन्य छुट्टियों की भी व्यवस्था की गई है।
वेतन में होगी दोगुनी बढ़ोतरी, पेंशन योजना भी शामिल
निगम के गठन के बाद कर्मचारियों के वेतन में बड़ी वृद्धि की जा रही है। फिलहाल जहां कर्मचारियों को ₹10,000 तक का वेतन मिलता है, वहीं अब न्यूनतम सैलरी ₹20,000 तय की जाएगी। विशेष श्रेणी के कर्मचारियों जैसे डॉक्टर और इंजीनियर के लिए अधिकतम वेतन ₹40,000 तक होगा। द्वितीय श्रेणी के कर्मचारियों को ₹25,000 और चतुर्थ श्रेणी को ₹20,000 मासिक वेतन मिलेगा। साथ ही, कर्मचारियों को पेंशन योजना का लाभ भी दिया जाएगा जिससे भविष्य में आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
10 लाख कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ
राज्य में लगभग 10 लाख आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं जिन्हें इस निर्णय का सीधा लाभ मिलेगा। वेतन वृद्धि के साथ स्वास्थ्य बीमा, चिकित्सा अवकाश और दुर्घटना बीमा जैसी सुविधाएं भी शुरू की जाएंगी। इससे कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक स्थिरता मिलेगी। यह निर्णय सरकार की दूरदर्शी नीति को दर्शाता है जो कर्मचारियों के सम्मान और सुरक्षा को प्राथमिकता देती है। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति अब तीन साल के अनुबंध पर होगी और मानदेय हर महीने की पहली से पांच तारीख के बीच जारी किया जाएगा।
निष्कर्ष:
उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम न केवल आउटसोर्स कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर करेगा, बल्कि सरकारी विभागों में कार्यक्षमता और पारदर्शिता भी बढ़ाएगा। कर्मचारियों को स्थिर नौकरी, बेहतर वेतन और सुरक्षा सुविधाएं मिलने से उनका मनोबल बढ़ेगा और वे अधिक समर्पण के साथ कार्य कर सकेंगे। यह पहल राज्य की रोजगार नीति में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।
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